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श्रीमती रमा गर्ग एक बेहद ही अभिव्यंजक कलाकार हैं जिन्हे पेंटिंग का बचपन से ही शौक है। जब वे एमबीबीएस कर रहे थे तब तब कई प्रकार के चित्र बनाते वक़्त उन्हे कला में अपनी रूचि को गंभीरता से लेते थे।अब जब अनके बच्चे बड़े हो गए तोह वे वापिस अपनी मनपसंद रूचि के लिए समय निकाल पा रहे हैं वैसे भी जब आपको कोई चीज़ इतनी पसंद हो तो आप समय निकाल ही लेते हैं। श्रीमती रमा गर्ग के लिए चित्र करना बिल्कुल वैसा ही है जैसे एक साधू के लिए साधना। उन्के लिए चित्र करना ध्यान करने जैसा है। डॉ। रमा गर्ग को चित्रों विशेष रूप से दो माध्यमों में पसंद है पहला तेल और दूसरा कॉफी। कॉफी इसलिए क्यूँकी उन्हे कॉफी की खुशबू बेहद पसंद है। हम सब ये बखूबी जानते हैं की एक चिकित्सक होना कितना ज़रूरी पर मुश्किल काम होता है, दिनभर की भाग दौड़ के बाद जो चीज़ आपको सकूँ दे वो बहुत ज़रूरी होती है। श्रीमती रमा गर्ग को आध्यात्मिकता के बारे में पढना, और जानना खासा पसंद है। वे पेंटिंग भी अत्यधिकतर भगवान भगवान कृष्ण की बनाते हैं। अध्यात्म का एक मकसद यही है कि आप स्वयं के बारे में और परमात्मा के बारे में जानकारी मिले।

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